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Poem #आज का कलयुग#

2018-06-19T13:15:54+00:00February 23rd, 2018|General Interest, Music & Poetry|

*आज का कलयुग* कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं।। कटा जब शीश सैनिक का, तो हम खामोश रहते हैं। कटा एक सीन